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आबकारी मुख्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक अमित अग्रवाल की नियुक्ति पर उठे गंभीर सवाल: मुख्य सचिव कार्यालय पहुंचे शिकायत पत्र में खुले कारनामों के पोल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आबकारी महकमे में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता। ताजा मामला उप आबकारी आयुक्त प्रयागराज कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक अमित अग्रवाल का है। मुख्य सचिव कार्यालय में एक शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें कहा गया है कि अमित अग्रवाल की लिपिक संवर्ग में नियुक्ति अवैध और फर्जी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सन 2000 में अमित अग्रवाल के पिता गोवर्धन दास अग्रवाल की सेवारत रहते हुए मौत होने पर उनकी नीति कंप्यूटर सहायक के रूप में हुई थी लेकिन जब 2012 में अमित अग्रवाल को पता चला कि कंप्यूटर सहायक की प्रोन्नति नहीं हो सकती तो उसने छल प्रपंच और कूट रचित दस्तावेजों से अपना समायोजन लिपिक संवर्ग में करा लिया इतना ही नहीं प्रमोशन भी प्राप्त कर लिया।

शिकायतकर्ता ने अमित अग्रवाल की नियुक्ति को चुनौती देते हुए इसकी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अमित अग्रवाल लगभग 20 वर्षों तक आबकारी मुख्यालय में तैनात रहकर करोड़ों रुपए की अवैध कमाई करके साम्राज्य खड़ा किया है इसकी भी जांच होनी चाहिए। शिकायतकर्ता की माने तो अमित अग्रवाल आबकारी मुख्यालय में तैनाती के दौरान गोपनीय सूचनाएं इकट्ठा कर शराब कारोबारियों को ब्लैकमेल करता था और उनसे उगाही करता था। अमित अग्रवाल पर यह भी आरोप है कि वह दक्षिण भारत के एक व्यवसाई नागेश्वर राव का करीबी था और नागेश्वर राव को उसने अवैध रूप से सिरा आवंटन कराने में मदद की थी।

फिलहाल अमित अग्रवाल पर लगे आरोपों से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी शिकायतों की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव कार्यालय को निर्देश दिया है।

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